Essay on Nauka Bihar (Boating) in Hindi For Class 7

परिचय: नौकाविहार पानी में खेल के लिए या  मनोरंजन की दृष्टि से नाव की मदद से पानी पर तैरने को कहतें हैं।   . यहाँ मैं दो अलग अलग स्थानों पर दो नौका विहार अनुभवों को प्रस्तुत कर  रहा हूँ।

सबसे पहले  नाव  का थोड़ा  सा इतिहास और कुछ महत्वपूर्ण जानकारी करने की कोशिस करते हैं।

नाव एक भूमिखंड से दुसरे भूमिखंड को जोड़ने का कम् सदियों से कर रहा है। यदि  हम अपने इतिहास को खोजें तो  पता चल जाएगा  की  पुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसार नाव   प्राचीन समय से  7,000-10,000 साल पहले से इस्तेमाल किया जा रहा है (विकिपीडिया) .  नौकाओं है कि पता चलता है।  प्राचीन नाव  आमतौर पर एक पेड़ के तने को  काट कर बनाया जाता था। प्राचीन समय में  सिंधु घाटी सभ्यता और मेसोपोटामिया के बीच वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए नव को  इस्तेमाल किया गया था। प्रसिद्ध नाविक जैसे  कोलंबस, Vasko दा गामा और मैगलन नाव के सहारे  महत्वपूर्ण खोज दुनिया को दिए हैं। . नावों  के तीन प्रकार  होते हैं Unpowered या मानव चालित नाव, सेलबोट और मोटरबोट।


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पहले नौकाविहार अनुभव: इसके पहले मै कभी बोटिंग नहीं किया था। बहुत दिन से मै  नौकाविहार के बारे में सोंच  रहा था।  इसके लिए मै  अपने पापा और मम्मी को मना  ली थी। इसके लिए हमने दुर्गापुर ( पश्चिम बंगाल ) के कुमारमंगलम पार्क को चुन। इसमें नौकाविहार की अच्छी सुविधा है। यह पार्क बेहद खूबसूरत है।  और इसका water पूल अंडाकार है , जो की बहुत दर्शनीय है। मै अपने पूरे परिवार के साथ एक नौका में चढ़ गयी।  यह नौका मैन्युअल था। अर्थात या motorised  नहीं था। इसमें दो सेट  पैडल लगा था। एक पैडल पे मै  बैठ गयी और एक पर मेरा भाई बैठ गया।  साम का समय  बहुत  सुहाना था।  पार्क में हलकी संगीत भी बजाई जाती है। मै  और  मेरा भाई मिलकर प्रोपेलर  को चला रहे थे। आधे घंटे के बाद हम थक गए। जब हम पानी में boating  कर रहे थे तो हाथ से पानी छूकर बहुत अच्छा लग रहा था। बोटिंग से एक बात का पता चल गया की मैन्युअल बोट में काफी परिश्रम लगता है।  लेकिन बहुत आनंद आता है।  पानी के बीचोबीच जो मंद हवा बहती है , उसका अनुभव बेहद आनंददायक था। एक बात हम और बताना चाहते हैं की जब भी आप boating  किजीये तो अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान दीजिए।  नौका में लाइव जैकेट का प्रबंध जरूर हून चाहिए , यदि थोड़ा  भी खतरा हो तो। पहली नौका विहार का बहुत अच्छा अनुभव था।  लेकिन मेरी अगली महत्वाकांक्षा मोटर नाव पर सवारी करने की थी। इसलिए इसको भी हम लोगो ने पूरा किया अंडमान निकोबार आइलैंड मे।  इसका अनुभव नीचे दिया गया है।


दूसरा नौकाविहार अनुभव:  यह यात्रा बहुत आनंददायक तो नहीं कह सकते हैं।  लेकिंन बहुत रोमाँचक बोल सकते हैं। इस यात्रा में मौत जैसी स्थिति  और रोमांचकारी पल का अनुभव हुआ। यह नौकाविहार जीवन के डरावने पल के आनंद की याद दिलाता है।  जिस नाव में हम लोग बैठे थे वह करीब चालीस यात्रियों के लिए बना था। हम सब इसे अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी portblair से पकड़े थे।  और northbay island के लिए हम सब जा रहे थे। जिंदगी में कभी समुद्री लहरों से सरोकार नहीं हुआ था , जो यहाँ आकर हुआ। यह यात्रा करीब 4.4 km  का था।  अपने चारो तरफ इतना पानी कभी नहीं देखा था।  जब आधी यात्रा हब सब जा चुके थे तभी एक व्यक्ति जोर से चिल्लाने लगा।  वह कहने लगा की मुझे बहुत डर लग रहा है। और हमें वापस ले चलो।  नव डगमगाने लगी और दोनों तरफ से पानी भरने लगा। वह आदमी चूँकि भारी भरकम बदन का था , इसीलिए ऐसा हो रहा था।  थोड़ी देर के लिए हम सब एकदम दर गए। उसके बाद नाविक ने उसे जोर से डांटा , और कहा कि  अगर तुम शांत नहीं बैठोगे तो यह नव तुरंत डूब जाएगी और यहाँ बचाने कोई उपाय नहीं है शिवाय लाइफ जैकेट के। और कहा की लाइफ जैकेट से बचने का रकार्ड बहुत अच्छा नहीं है।  क्योंकि बहुत सारे यात्री दर से मारे जाते हैं। उसके बाद वह बैठकर रोने लगा। हम सबने नाव से पानी को निकाल दिए। किसी तरह हम सब norhtbay island  में पहुँच गए। वहां सबसे अच्छा अनुभव यह हुआ की जीवन में समुद्र में नहाया और बहुत सुन्दर-सुन्दर corals देखा। यह बात भी तय हो गया की किताबों में द्वीप शब्द कुछ ख़ास असर नहीं डाल पता है।  लेकिंन यहाँ दिमाग के रास्ते यादें  दिल में उतर गई तथा कभी न भूलने वाला चित्र दिमाग में छप गया। वहां हम सबने ताजे -ताजे नारियाल खाया। और हम वहां दोपहर का लंच भी किया। उस द्वीप में कोई रहता नहीं है।  इसलिए वहां लंच करना काफी आनंददायक था और बहुत महंगा भी था।  वहां से हम सब चार बजे portblair पहुँच गए। वहां की यादों को हम सब ने कैमरे में कैद कर लिया।  


मै  सभी को यही सलाह दूंगा की जिंदगी में तैरना जरूर सीख लें।  पता नहीं कब जिंदगी में पानी से मुलाकात हो और जिंदगी पानी -पानी हो जाए। यहाँ पर एक मशहूर शायर मंजर भोपाली  की एक शायरी याद आ रही है। 

जिंदगी में कभी इतना नहीं माँगा करते। 
मांगने वालों से कांसा  नहीं माँगा करते। 
कभी दरीयाओं से कतरा नहीं माँगा करते। 
कभी कतराओं से छोटा नहीं सोचा करते।  

आज कल हिंदी में निबन्ध की मांग बढ़ गयी है। इस निबन्ध के बाद मै  insurance के बारे में लिंखुन्गा।  आज कल तो boat  insurance  भी होता है। क्या कहूँ  अध्यापक गण  तो essay  topics  की भरमार लगा दे रहें हैं।  ठीक है लीजिये यह निबन्ध पधिये। नहीं तो आप बोलेंगे की मजाक कर रहा हूँ।



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